Saturday, 7 June 2014




आज कल मुझे मुस्कुराहटो से डर लगने लगा है
हकीक़त तो क्या सपनो में भी डर लगने लगा है
मुस्करा कर कोई देखे तो समझना कोई काम है 
वरना मुफ्त में क्या कही कोई होता बदनाम है 
मुस्कुराह्टो पर अगर गए तो सारा काम तमाम है 
जर जमीं और न जाने क्या क्या खोना आम है 
नजर का फेर है इसीलिए मुखोटा ओड़ा गया है 
दिल का हाल भेदने को, हर तीर छोड़ा गया है 
ये तो है नज़र का भ्रम, और फिर सब कुछ गया है 
अपना समझा था जिसे, माजरा बहुत दूर तलक गया है
सीने में रखते है खंजर और मुंह पर मुस्कराहटे हज़ार है
सच है आस्तीन के सांपो की आज चहु और फेली भरमार है
जमाने का क्या कहे आज, पुरुषो में भी सौतिया डाह है
मुस्करा कर कत्ल करके , न लेते ये कभी आह है
सच है मुस्कुराने के रंग कई और मतलब हज़ार है
मन का क्या है, यह तो लुटता पिटता कई बार है
कोई मुस्कुराया तो दिल में लड्डू फुटा हर बार है
मिला तो ठीक वर्ना, अंगूर तो खट्टा हर बार है
मेरा कहा मान भी लो, यह सिर्फ बचा खुचा व्यापर है
मुस्कुराहटो पर जा निसार, यह जुमला अब बेकार है

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